सेना ने चीन का खोजा 'तिब्बती इलाज', कमजोर नस दबेगी तो तिलमिलाएगा ड्रैगन

भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी फौज के सामने सीना ताने खड़ी तो है ही, अब वो पीछे से चल रहे चीनी प्रॉपगैंडा को मात देने में भी जुट गई है। इसके लिए सेना ने तिब्बत के इतिहास, वहां की संस्कृति और भाषा को जानने-समझने की रणनीति बनाई है।

इसके तहत आर्मी अफसरों को एलएसी के दोनों तरफ के तिब्बत का गहराई से अध्ययन करने को कहा जाएगा।
एआरटीआरएसी ने तिब्बतॉलजी में पोस्ट ग्रैजुएट की डिग्री देने वाले सात संस्थानों की पहचान की है जहां आर्मी अफसरों को अध्ययन के लिए छुट्टी पर भेजा जा सकता है।

सेना का कहना है कि एक बार चीन और तिब्बत की भाषाई, सांस्कृतिक और व्यावहारिक समझ विकसित कर लेने पर अफसर को लंबे समय तक एलएसी के पास तैनाती सुनिश्चित कर दी जाएगी।
चीन के लिए तिब्बत एक दुखती रग है जिसे भारत ने अब तक नहीं छेड़ा है। भारत ने 1954 में ही बड़ा मौका खो दिया जब चीन के साथ ट्रेड अग्रीमेंट के दौरान तिब्बत क्षेत्र को चीन का हिस्सा मान लिया।

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