सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को अपनी दवा का ट्रेडमार्क कोरोनिल रखने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया

बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने 23 जून 2020 को ‘कोरोनिल’ दवा पेश करते हुए दावा किया था कि उसने कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज ढूंढ लिया है। हालांकि कोरोनिल के लॉन्च के कुछ घंटे बाद ही आयुष मंत्रालय ने दवाई के प्रचार पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद उत्तराखंड की आयुर्वेद ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी ने ‘दिव्‍य कोरोनिल टैबलेट’ पर सवाल उठाते हुए कहा, पतंजलि को कोरोना की दवा के लिए नहीं, बल्कि इम्युनिटी बूस्टर और खांसी-जुकाम की दवा के लिए लाइसेंस जारी किया गया था। इसके बाद कई राज्यों ने दवा की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोनिल को लेकर सफाई दी और कहा कि हमने कोरोना की कोई दवा नहीं बनाई है। उत्तराखंड के आयुष विभाग को भेजे गए नोटिस के जवाब में

पतंजलि की ओर से कहा गया कि उन्होंने कोरोना वायरस की दवा बनाने का कोई दावा नहीं किया है। हमने कोई भी कोरोना वायरस की दवा नहीं बनाई है, हमने वैसी दवा बनाई है, जिससे कोरोना के मरीज ठीक हुए हैं।

बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पतंजलि आयुर्वेद पर 10 लाख जुर्माना लगाते हुए कोरोनिल ट्रेडमार्क के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। हालांकि इसके बाद दो जजों की बेंज ने सिंगल बेंच के आदेश को रद्द कर दिया और पतंजलि को ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने की अनुमति दी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था।

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