सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बैंकों को हो सकता है 2000 करोड़ का नुकसान

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लोन मोराटोरियम पीरियड के दौरान इंट्रेस्ट पर इंट्रेस्ट भुगतान में छूट की घोषणा की है. सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 1800 से 2000 करोड़ रुपये का ‘नुकसान’ उठाना पड़ है. बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में 60 फीसदी कर्जदारों ने इस छूट का लाभ उठाया था.

उदाहरण के लिए यदि किसी ग्राहक ने तीन महीने के लिए किस्त भुगतान की छूट ली है, तो तीन महीने के लिए उसका चक्रवृद्धि ब्याज माफ किया जाएगा.ऐसे में मोटे अनुमान के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 2,000 करोड़ रुपये से कम की चोट लगेगी. वही इस बीच, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने सरकार को पत्र लिखकर बैंकों को ब्याज पर ब्याज दी गयी छूट की भरपाई करने को कहा है.

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