सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, माता-पिता के पास है बेटी तो यह अवैध हिरासत नहीं

केरल के एक कथित आध्यात्मिक गुरु की अपनी लिव-इन पार्टनर को उसके माता-पिता की हिरासत से आजाद कराने संबंधी याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई करने से मना कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कस्टडी और हिरासत में बहुत बड़ा अंतर होता है।

यदि बेटी माता-पिता के पास है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे अवैध हिरासत मान लिया जाए। लड़की की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। जहां तक लड़की की इच्छा की बात है तो कमजोर मानसिक स्थिति वाले व्यक्ति को खुद के लिए फैसला लेने की आजादी नहीं होती है।

अदालत ने कहा मानसिक स्थिति ठीक न होने से व्यक्ति अलग-अलग तरह की बातें करता है। ऐसे में उसकी बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

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