विस्फोटक बना किसान आंदोलन: भयानक खतरे की ओर बढ़ा देश, कैसे भी शुरू करें बात

पिछले दिनों एक निजी सर्वे में जब किसानों से पूछा गया कि आप इन कानूनों के पक्ष में हैं या विरोध में, जवाब में 52 प्रतिशत किसानों ने कहा ‘विरोध में’ जबकि कानून के पक्ष में बताने वाले किसानों की संख्या महज 35 प्रतिशत थी।

ऐसे में यह कहना कि बहुसंख्यक किसान कृषि कानूनों के पक्ष में हैं गलत है।
बता दे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत अब सरकार को अक्टूबर तक का समय देने की बात कही है। उसके बाद देशभर में 40 लाख ट्रैक्टरों की रैली निकालने की चेतावनी दी है।

संयुक्त किसान मोर्चा का फैसला है कि 6 फरवरी को देशभर की मुख्य सड़कों पर दिन के 12 से 3 बजे तक कोई गाड़ी नहीं चलने दी जाएगी। जो हालात बन रहे हैं उससे ऐसा लग रहा है कि अगर किसानों की न सुनी गई तो न तो संसद चल पाएगी और न ही देश।

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