लद्दाख में मान नहीं रहा चीनी ड्रैगन, अमेरिका ने तैनात किए सबसे घातक परमाणु बॉम्‍बर -

भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच सहमति के बाद भी चीन पैंगोंग झील और देपसांग इलाके से अपनी सेना को पीछे हटा नहीं रहा है। यही नहीं चीन भारत की सीमा से लगे अपने इलाके में नए हवाई ठिकाने बनाकर अपने सैन्‍य ठिकाने पर परमाणु मिसाइल DF-26 को तैनात कर दिया है।

चीन की इस जोरदार सैन्‍य तैयारी का करारा जवाब देने के लिए अमेरिका ने बिना शोर मचाये भारत की मदद के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक B-2 बॉम्‍बर को भेज दिया है।

अमेरिका अक्‍सर B-2 स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर को दुश्मन की सेना को तबहा करने के लिए अलग-अलग हिस्‍सों में तैनात करता है।
आपको बता दें कि B-2 बॉम्‍बर अपने आप में दुनिया का सबसे घातक बॉम्‍बर है। यह बमवर्षक विमान एक साथ 16 परमाणु बम ले जा सकता है। हाल ही में इसके बेड़े में बेहद घातक और सटीक मार करने वाले B61 परमाणु बम शामिल किए गए हैं। यह बॉम्‍बर किसी भी रेडार की पकड़ में नहीं आता चाहे वो रडार चीन के हो या रूस के.

यही नहीं यह दुश्‍मन के हवाई डिफेंस को चकमा देकर आसानी से उसके इलाके में घुस जाता है। यानि चाइना का S-400 इस एयर डिफेन्स सिस्टम इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. इसलिए यह दुश्‍मन की जमीन पर हमला करने में सबसे कारगर बॉम्‍बर माना जाता है। वर्ष 1997 में एक B-2 स्प्रिट बॉम्‍बर की कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर थी। अमेरिका के पास कुल 20 B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर हैं। यह बॉम्‍बर 50 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए 11 हजार किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम है।

एक बार रिफ्यूल कर देने पर यह 19 हजार किलोमीटर तक हमला कर सकता है। यानि के बार तेल भरने के बाद ये विमान पूरी दुनिया का चक्कर लगा सकता है.

वही अमेरिका के इंडो-पैसफिक कमान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तीन B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर डियागो गार्सिया में तैनात किए गए हैं। ये विमान करीब 29 घंटे की यात्रा करके अमेरिका के मिसौरी एयरफोर्स बेस से डियागो गार्सिया पहुंचे हैं। अमेरिका ने कहा क‍ि 29 घंटे की यह यात्रा यह दर्शाती है कि अमेरिका अपने दोस्‍तों और सहयोगियों की मदद के लिए बेहद घातक और लंबी दूरी तक किसी भी समय और कहीं भी हमला करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

यूएस एयरफोर्स के कमांडर कर्नल क्रिस्‍टोफर कोनंत ने कहा, ‘हम भारत जैसे की महत्‍वपूर्ण दोस्त का साथ पाकर बहुत रोमांचित महसूस कर रहे हैं।’

माना जा रहा है कि करीब डेढ़ साल बाद परमाणु बॉम्‍बर की इस तैनाती के जरिए अमेरिका ने चीन और ईरान को बड़ा संदेश दिया है। ये बॉम्‍बर ऐसे समय पर डियागो गार्सिया पहुंचे हैं जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा विवाद चरम पर पहुंच गया है। चीन ने बड़े पैमाने पर अपनी सेना और फाइटर जेट भारत से सटी सीमा पर तैनात किए हैं। लद्दाख में चीन की इस दादागिरी की अमेरिका ने खुलकर आलोचना की है। यही नहीं कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर ने मलक्‍का स्‍ट्रेट पार करके भारतीय नौसेना के साथ अंडमान निकोबार के पास सैन्‍य अभ्‍यास किया था।

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