लद्दाख में जारी गतिरोध के बीच ठंड की एंट्री, तापमान माइनस 4 डिग्री तक गिरा, चीन की हालत नाजुक

पिछले महीने तक विशेषज्ञों और दिग्गजों की ओर से लगातार दावा किया जाता रहा है कि अगली सर्दियों में लद्दाख में जारी चीन सैन्य गतिरोध का जवाब किस तरह से दिया जा सकता है.

आपने पहले ऐसी कई तस्वीरें भी देखी होंगी जिसमें भारत और चीन के सैनिक सर्दियों के मौसम में बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्र में किस तरह गरम कपड़ों में ढके होते हैं. दोनों तरफ से इस बार भी जबर्दस्त ठंड से बचने को लेकर खासी तैयारी की जा रही है.

खैर, अब चीन को और इंतजार नहीं करना है. वह खतरनाक सर्दी आ गई है.

बता दे की फिंगर 4 में जहां भारतीय और चीनी सैनिक हैं वहां का तापमान गिरकर शून्य से 4 डिग्री नीचे चला गया है. अक्टूबर के मध्य तक, झील की सतह पूरी तरह से जम जाएगी.

वही लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ के डेपसांग और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्रों में, न्यूनतम तापमान पहले से ही माइनस 14 डिग्री के आसपास पहुंच गया है, और हर गुजरते दिन के साथ तेजी से तापमान में गिरावट आएगी.

29 अगस्त से 8 सितंबर के बीच दोनों पक्षों के सैनिकों की ओर से चेतावनी के रूप में 4 बार हवा में गोलीबारी की जा चुकी है. मौसम में तेजी से बदलाव आने लगा है. पिछले चार दिनों में, भारत ने ऊंचाई वाली सभी लोकेशनस पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. इस दौरान ऊंचाई वाली जगहों पर तेज हवा और अत्यधिक ठंड की स्थिति और खराब होती जा रही है.

जिससे भारतीय सेना को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. हर गुजरते दिन के साथ यहां पर स्थितियां और खराब होती जाएंगी. नियमित रूप में नए सैनिकों को यहाँ लाया जा रहा है.

भारतीय और चीनी फॉरवर्ड पोस्ट एक-दूसरे की सेना पर मौसम के प्रभाव पर लगातार नजर रख रहे हैं. जबकि एक साल पहले तक स्थिति यह थी कि दोनों ओर के सैनिक एक-दूसरे की मेडिकल स्तर पर मदद किया करते थे. लेकिन अब बदले हालात में अविश्वास और शत्रुता के माहौल में ऐसा सोचना असंभव सा है.


हालांकि भारतीय पोस्टों में भी विशेष चिकित्सा उपकरणों और स्ट्रेचर के साथ मेडिकल की सुविधा उपलब्ध हैं, जिसमें सैनिकों को भीषण ठंड से होने वाले शीतदंश, चिलब्लेन्स, और हाई अल्टीट्यूड पुलमोनरी ओडेमा यानि (HAPO) जैसे खतरनाक स्थितियों के शिकार लोगों के इलाज की व्यवस्था की गई है.

हालांकि भारतीय सेना के सैनिकों को पैंगोंग झील की तुलना में कहीं अधिक ऊंचाई पर रहने का लंबा और गहरा अनुभव है. भारतीय सेना बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों सियाचिन ग्लेशियर और साल्टोरो रिज में साल भर तैनात रहती है.

पैंगोंग हाइट्स में जहां 16,000 फीट की ऊंचाई पर सैनिक तैनात किए जाते हैं तो सियाचिन में पद करीब 22,000 फीट की ऊंचाई पर सैनिकों की तैनाती होती है. माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 29,000 फीट है. दशकों से बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों की तैनाती की वजह से भारतीय सेना को ऐसी परिस्थितियों का सामना करने का खासा अनुभव है.

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