लड़कियों की शादी की उम्र में बदलाव की तैयारी को ले के पीएम मोदी के फैसले का हो रहा विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने के संकेत दिये हैं, जिसके बाद इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गयी है. इधर मोदी के फैसले के खिलाफ 100 से अधिक नागरिक संस्थाओं ने सरकार से अपील की है और दावा किया है यह कदम मांओं और शिशुओं की सेहत में सुधार लाने में खास मदद नहीं कर पाएगा.

उन्होंने दावा किया है, यह लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकारों या लड़कियों के सशक्तीकरण को बढ़ावा नहीं देगा और मांओं एवं शिशुओं की सेहत को सुधारने में खास मददगार नहीं होगा. संस्थायो के हिसाब से पुरुष और महिलाओं की शादी की उम्र को सामान रखना केवल व्यर्थ है, इसमें किसी तरह का लैंगिक समानता नहीं दिखता।

उल्टा गरीब घरों के लोगों के लिए यह चिंता का कारण हो जाएगा क्योंकि उनके यहां बेटी की शादी करके उसे अच्छा घर दिलाना और सेटल करना बहुत दिक्कत वाला काम होता है।

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