भ्रष्ट और सुस्त अफसरों को जबरन रिटायर करेगी केंद्र सरकार, तैयार हो रही लंबी सूची

सरकार ने केंद्रीय संस्थानों से ऐसे अधिकारियों की रिपोर्ट मांगी थी। जिनकी आम जनता बहुत ज्यादा शिकायत करती है और जो अधिकारी अपनी ड्यूटी का सही से पालन नहीं कर रहा है.

केंद्र सरकार अपने मंत्रालयों और विभागों में लंबे समय से बैठे भ्रष्ट और सुस्त अफसरों की सेवा पर कैंची चलाने के लिए लंबी सूची तैयार कर ली है। पचास साल की आयु का पड़ाव पार कर चुके इन अफसरों को एफ.आर 56 रूल्स-1972 नियम के तहत जबरन रिटायरमेंट दी जाएगी। इनमें सभी श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं।

सभी केंद्रीय संस्थानों से इन अधिकारियों की रिपोर्ट मांगी गई थी। कोरोना संक्रमण के दौरान इन अधिकारियों की फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं। लेकिन अब केंद्र सरकार ने कमेटी का नए सिरे से गठन कर दिया है। इसमें 50 आईएएस अधिकारी और एक कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के सदस्य शामिल है।
बता दें कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज 1972 के नियम 56(J) के अंतर्गत 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र पर पहुंचे अफसरों की सेवा समाप्त की जा सकती है। ऐसे अफसरों को जबरन रिटायरमेंट दे दी जाती है।

संबंधित विभाग से इन अफसरों की जो रिपोर्ट तलब की जाती है, उसमें भ्रष्टाचार, अक्षमता व अनियमितता के आरोप देखे जाते हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो अफसरों को जबरन रिटायरमेंट दे दी जाती है। ऐसे अधिकारियों को नोटिस एवं तीन महीने के वेतन-भत्ते देकर घर भेजा जा सकता है।

अब जल्द ही भ्रष्ट, अक्षम और सुस्त अधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इन अफसरों की पिछले कई वर्षों की रिपोर्ट के आधार पर इन्हें जबरन रिटायरमेंट देने का फैसला लिया जा चूका है।

केंद्र सरकार के अलावा कई राज्य सरकारें भी अपने अधिकार क्षेत्र वाले भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब छह सौ अफसरों को जबरन रिटायरमेंट देने का फैसला किया था।

बता दे की बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं, जो अफसरों की लापरवाही के चलते समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं। यही वजह है कि अब केंद्र सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को समय से पहले घर भेज रही है। इनको रिटायरमेंट देने के बाद सरकार नए और मेहनती अधिकारियो को जॉब पर रखना शुरू करेगी जिससे रोजगार भी बढेगा और आम जनता को भी फायेदा होगा.

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