भारत के लिए खुशखबरी, इजरायल-यूएई के बीच हुई दोस्‍ती, ईरान और चीन को लगा झटका

दुनिया के दो दुश्‍मन देश इजरायल और संयुक्‍त अरब अमीरात करीब 72 साल बाद ‘दोस्‍त’ बन गए हैं। अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की मध्‍यस्‍थता के बाद इजरायल और यूएई ने शांति समझौते पर हस्‍ताक्षर किया है। ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू और अबूधाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद अल नहयान के बीच हुए इस समझौते को ‘एक वास्‍तविक ऐतिहासिक मौका’ करार दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील न केवल ईरान और चीन की दोस्‍ती का जवाब है, बल्कि भारत के लिए भी बड़ी खुशखबरी है।

अंतरराष्‍ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ कहते हैं कि इजरायल और यूएई ने ईरान के बढ़ते खतरे को देखते हुए साथ आने का फैसला किया है। ईरान और चीन के बीच बड़ी डील हुई है। चीन और ईरान के इस गठजोड़ का जवाब देने के लिए यूएई ने इजरायल से हाथ‍ मिलाया है। यूएई और सऊदी अरब की पाकिस्‍तान से दूरी बढ़ रही है। इसी वजह से यूएई को फलस्‍तीन का साथ छोड़कर इजरायल का दामन थामना पड़ा है।

यमन की जंग में सऊदी अरब बुरी तरह से फंसा हुआ है और पाकिस्‍तानी सेना की मदद के बाद भी जंग खत्‍म नहीं हो पा रही है। क्योकि पाकिस्तानी सेना जहा जाती है वाही बेइज्ज़ती करा कर वापिस आती है. और इसमें इजरायल सऊदी अरब की मदद कर सकता है। यही नहीं इजरायल ईरान को काउंटर करने में सऊदी अरब और यूएई की मदद कर सकता है।

बता दे की अभी सऊदी अरब में बड़ी संख्‍या में पाकिस्‍तानी सैनिक रहते हैं और इस डील के बाद अब इन सबको पाकिस्तान वापिस भगा दिया जाएंगा। पाकिस्‍तान और सऊदी अरब की दूरियां बहुत बढ़ गई हैं। दोनों के बीच कश्मीर समेत कई मुद्दों पर मतभेद काफी बढ़ गया है। भारत के अरब देशों और इजरायल दोनों ही देशों से अच्‍छे संबंध है।

भारत का ज्‍यादातर तेल अरब से ही आता है। भारत चाहता है कि सऊदी अरब और यूएई में शांति रहे। अगर सऊदी अरब से पाकिस्‍तान से हटता है तो यह भारत के लिए खुशखबरी है। इससे भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही फायदा होगा। सऊदी अरब में भारत का भी प्रभाव और बढ़ सकता है।

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