'प्लान गंगाजल' से हारेगा कोरोना वायरस! मेडिकल साइंस की रिसर्च में मिला इलाज का कारगर तरीका

चीन से निकले कोरोना वायरस से पूरी दुनिया खतरे में है. इस महामारी का अभी तक कोई ठोस और कारगर ईलाज नहीं ढूंढा जा सका है. कोरोना वायरस के खात्मे और असर को कम करने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में लगातार शोध हो रहे हैं. दवाइयों और वैक्सीन के ट्रायल चल रहे हैं.

लेकिन इन सबके बीच धर्मनगरी वाराणसी से गंगा के जल को लेकर बड़ा शोध हुआ है. काशी विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में हुए रिसर्च के बाद यह दावा किया जा रहा है कि गंगाजल में मौजूद बैक्टीरियोफेज यानी जीवाणुभोजी में कोरोना को शिकस्त देने का माद्दा है. इस रिसर्च टीम के लीडर MS डॉ. विजयनाथ मिश्र की मानें तो रिसर्च में इस बात का भी अध्ययन किया गया है

कि गंगा किनारे बसे शहरों में वो लोग जो प्रतिदिन गंगा स्नान करते हैं या फिर किसी न किसी तरीके से गंगाजल ग्रहण करते हैं, उन पर संक्रमण का प्रभाव अभी तक नहीं दिखा है. यही नहीं, गंगा किनारे के चालीस के करीब शहरों में कोरोना संक्रमण के केस बहुत कम आए है.

रिसर्च के शुरुआती अध्ययन में गंगा नदी कि करीब सौ जगहो पर रिसर्च किया गया. रिचर्स के बाद गंगोत्री से करीब 35 किलोमीटर नीचे गंगनानी में मिलने वाले गंगाजल चिन्हित हुआ और इसे ह्यूमन ट्रायल में प्रयोग किए जाने की तैयारी तेज हो गई है. ह्यूमन ट्रायल में बिना दवा से छेड़छाड़ किए आधे लोगों की नाक में गंगनानी का गंगा जल और बाकी को सादा डिस्टल वाटर डाला जाएगा. जिनकी बाद रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी.

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