नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली के भारत के प्रति सुधरे रवैए से बौखलाया चीन, अब ऐसे बना रहा दबाव

हाल के दिनों में नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार से भारत के साथ फिर से अच्छे संबंध बहाल करने के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन, पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों में बहुत ज्यादा दरार पैदा कर चुका चीन इस बात को हजम नहीं कर पा रहा है। लगता है कि वह नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भारत से दूर रखने के लिए सभी तरह की कोशिशें शुरू कर चुका है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार ओली के बदले रवैए से कितनी बौखलाई हुई इस बात का अंदाजा इसी से लग सकता है कि अब वह इस ताक में लग चुकी है कि अगर नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत को लेकर उसका एजेंडा नहीं माना तो वह उनका तख्तापलट भी करवाने की भी कोशिश कर सकती है।

नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली की सरकार अब भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने के पक्ष में दिख रही है।

भारत के बाद नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावाली की भी दिसंबर में भारत आने की संभावना है, जिसकी तारीख अभी तय नहीं की गई है। दोनों देशों के बीच इस साल तब द्विपक्षीयसंबंधों में दरार पैदा हो गई थी, जब नेपाल लिपुलेख क्षेत्र में बन रहे 80 किलो मीटर की सीमावर्ती सड़क का विरोध किया था और उस इलाके पर अपना दावा जताया था। 

बताया जा रहा है कि इस महीने की शुरुआत में नेपाली पीएम ओली ने चीन की ‘कुख्तात’ राजदूत हू यांकी को यह कह दिया था कि वह अपनी पार्टी की गतिविधियों के संचालन में सक्षम हैं और उन्हें दूसरे देश की सहायता की कोई जरूरत नहीं है। शायद जिनपिंग की सरकार इसी बात से तिलमिला गई है। चीन चाहता है कि नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी भारत के खिलाफ दुश्मनी का बर्ताव जारी रखे।

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