देश के प्राइवेट सेक्टर की पहली मिसाइल तैयार; अब हिंदुस्तान में बनाये जायेगे दुनिया के सबसे घातक हथियार

सरकार आत्मनिर्भर भारत के तहत ना सिर्फ हथियारों का आयात कम कम करना चाहती है, बल्कि स्वदेशी हथियारों को दूसरे देशों को बेचना भी चाहती हा। इसके लिए मोदी सरकार ने रोडमैप भी तैयार कर लिया है। इन हथियारों को बेचने के लिए डिप्लोमैटिक चैनल का इस्तेमाल किया जाएगा।

यह जानकारी यूनियन डिफेंस प्रॉडक्सन सेक्रेटरी राजकुमार ने दी। वहीं, भारत में निजी क्षेत्र ने पहली मिसाइल बना ली है। तीसरी पीढ़ी की इस एंटी टैंक मिसाइल का परीक्षण अगले 1 साल के भीतर होने की उम्मीद है। आर्मी में लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा कि आर्मी को स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल करने में कोई परेशानी नहीं है। बस क्वॉलिटी के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। 

वही रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर बैन की घोषणा की है। ऐसे समय में निजी क्षेत्र द्वारा मिसाइल बनाने की खबर आत्मनिर्भर भारत की ओर बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा, सेना स्वदेशी हथियारों से लड़कर ही जंग जीतेगी। लेकिन हमें ये ध्यान रखना होगा कि भविष्य की जंग कुछ अलग तरह की होंगी, हमें पुराने हथियारों को छोड़कर नई तकनीकी पर फोकस करना होगा।

 

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