ट्रैक्टर परेड पर खर्च हुए 2.25 अरब रुपये, किसानों ने भर दिया सरकार का खजाना

किसान संगठनों और सरकार के बीच चल रही बातचीत भले ही बेनतीजा रही हो, मगर किसानों ने अपने आंदोलन से केंद्र एवं राज्य सरकारों को खासा फायदा पहुंचा दिया है। दो माह से जारी किसान आंदोलन और 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली में पेट्रोल-डीजल का खर्च देखें तो यह सवा दो अरब रुपये से अधिक पहुंच रहा है।

दावा किया गया है की दिल्ली में 2 लाख ट्रेक्टर आये थे। ऐसे में एक ट्रैक्टर को रैली पूरी करने के लिए 25 लीटर डीजल चाहिए।
ऐसे में एक ट्रैक्टर का खर्च लगभग 5500 रुपये बैठता है। ऐसे में दो लाख ट्रैक्टर का खर्च 83 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक चला जाता है।

इन सभी ट्रैक्टरों में लगे डीजल का खर्च भी जोड़ा जाए तो यह लगभग 84 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है। ट्रैक्टरों के अलावा किसान आंदोलन में कार, बाइक व छोटे ट्रक भी शामिल रहे हैं। इनकी संख्या एक लाख से अधिक बताई जाती है। इसलिए किसानो ने ना चाहते हुए भी सरकार की जेब में करोड़ो रूपये डाल दिए है.

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