चीन ने पहली बार स्वीकारा, गलवांन घाटी में हुई झड़प में मारे गए थे उसकी फौज के इतने सैनिक

भारत और चीन के बीच मई की शुरुआत से सीमा विवाद जारी है। चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश कर रहा है जिसका भारतीय सेना के जवान उसे मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। इसी बीच चीन ने पहली बार माना है कि गलवां घाटी की झड़प में उसके सैनिकों की भी मौत हुई थी। इससे पहले तक चीन इस बात को मानने से इनकार कर रहा था।

चीनी सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने माना है कि गलवां घाटी में चीन की सेना को नुकसान पहुंचा था और कुछ जवानों की जान गई थी। अखबार के प्रधान संपादक हू शिजिन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान को ट्वीट कर लिखा कि जहां तक मुझे पता है गलवां घाटी की झड़प में चीनी सेना के जवानों की मरने वाली संख्या भारत के 20 के आंकड़े से कम थी।

उन्होंने कहा कि चीन ने भारत के किसी सैनिक को बंदी नहीं बनाया जबकि भारत ने उस दिन ऐसा किया था।

वहीं गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में भारत-चीन सीमा विवाद मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि हम पूर्वी लद्दाख में चुनौती का सामना कर रहे हैं, हम मुद्दे का शांतिपूर्ण ढंग से हल करना चाहते हैं और हमारे सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।

इसके अलावा राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन 1962 से ही, भारत की लगभग 38,000 स्क्वायर किलोमीटर भूमि पर इनलीगल कब्जा लद्दाख में किए हुए है। इसके अलावा, 1965 में, पाकिस्तान ने पीओके की 5,180 स्क्वायर किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भी चीन भारतीय क्षेत्र की लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर पर चीन अपना दावा कर रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं देश के 130 करोड़ लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम देश का मस्तक किसी भी कीमत पर झुकने नहीं देंगे और न ही हम किसी का मस्तक झुकाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सेना ने गलवांन में चीन को भारी नुकसान पहुंचाया। राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन की कथनी और करनी में फर्क है।

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