कैलाश पर्वत के बड़े हिस्से को भारत ने अपने अधिकार क्षेत्र में लिया, 7 सितम्बर की रात मिली थी ये कामयाबी

7 सितम्बर की रात को पैंगोंग झील के पर भारतीय सेना की कार्रवाई से भारत को चीन पर सामरिक-बढ़त तो मिल ही गई, साथ ही पहली बार ’62 के युद्ध के बाद भारत को कैलाश पर्वत-श्रृंखला को भी अपने अधिकार-क्षेत्र में करने का बड़ा मौका मिला है.

जी हां, दोस्तों भारत के सबसे बड़े और पवित्र तीर्थ-स्थल में से एक कैलाश मानसरोवर की कैलाश-रेंज. कम ही लोग जानते हैं कि भारत से कैलाश मानसरोवर झील जाने के लिए सबसे करीबी रास्ता लद्दाख से होकर ही गुजरता है.

7 सितम्बर की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग-त्सो झील के दक्षिण में करीब 60-70 किलोमीटर तक का पूरा क्षेत्र अपने अधिकार में कर लिया है.‌ चुशुल सेक्टर के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र की गुरंग हिल और रेचिन-ला दर्रा सभी कैलाश रेंज का हिस्सा है.

1962 के युद्ध से पहले ये पूरा इलाका भारत के अधिकार-क्षेत्र में था. लेकिन ’62 के युद्ध में रेजांगला और चुशुल की लड़ाई के बाद दोनों देश की सेनाएं इसके पीछे चली गई थीं और इस इलाके को पूरी तरह खाली कर दिया गया था. आपके बता दें कि भारत से पवित्र कैलाश मान‌सरोवर यात्रा के लिए सबसे छोटा‌ और सुगम रास्ता लद्दाख से ही है. ’62 के युद्ध से पहले तीर्थयात्री लद्दाख के डेमचोक से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाया करते थे.

डेमचोक से कैलाश मानसरोवर की दूरी करीब 350 किलोमीटर है. लेकिन ’62 के युद्ध के बाद से ही ये रूट बंद कर दिया गया था. इ‌सके बाद भी चीनी सेना डेमचोक में घुसपैठ की कोशिश करती रही और भारत‌ द्वारा सड़क‌ और दूसरे मूलभूत ढांचे बनाने का विरोध भी ज़ारी रखा.

लेकिन 7 सितम्बर की भारत की कार्रवाई से चीनी सेना में हड़कंप मच गया है. चीनी सेना किसी भी कीमत पर इन कैलाश रेंज की पहाड़ियों को हड़पना चाहती है. इसीलिए बड़ी तादाद में चीनी सैनिक भारत की फॉरवर्ड पोजिशन के चारों तरफ इकठ्ठा हो रहे हैं.

चीनी सेना अपने टैंक और आईसीवी व्हीकल्स के साथ एलएसी से सटे अपनी पोस्ट्स पर अपना जमावड़ा कर रही है.

वही भारतीय सेना ने रेचिन-ला दर्रे के करीब अपनी पूरी एक टैंक ब्रिगेड तैनात कर दी है. साथ ही इंफेंट्री रॉकेट लॉन्चर और एटीजीएम यानि एंटी टैंक गाईडेड मिसाइलों से तैनात हैं. ताकि अगर चीनी सेना आगे बढ़ने की कोशिश करती है तो उसे पीछे खदेड़ दिया जाए.

आपको बता दें कि कैलाश पर्वत के करीब पवित्र मानसरोवर झील हिंदुओं का पवित्र धर्म-स्थल है. ये झील तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा है और भारत-चीन-नेपाल सीमा के बेहद करीब है. ये झील इस ट्राइ-जंक्शन के विवादित इलाके लिपूलेख और कालापानी के बेहद करीब है. ये वही लिपूलेख दर्रा और कालापानी इलाका है जिसकों लेकर हाल ही में नेपाल ने नया नक्शा जारी कर अपना बताया है.

हालांकि, ये इलाके सदियों से भारत का हिस्सा हैं और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के अधिकार-क्षेत्र में है. माना जा रहा है कि नेपाल की सरकार ने चीन के इशारे पर इस इलाकों को अपने नए नक्शे में शामिल किया है.

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