किसान कितने शक्तिशालीः चक्का जाम ने साबित कर दिया, आंदोलन देशव्यापी

चक्का जाम का देशव्यापी समर्थन आंदोलनकारी किसानों की बहुत बड़ी सफलता कही जा सकती है। इस तीन घंटे के जाम का पूरे देश में असर रहा और अमन चैन भी दिखा। हिंसा न होने देने की किसानों की कटिबद्धता भी सामने आई और केंद्र सरकार के मंत्रियों के इस दावे की हवा भी निकल गई कि ये आंदोलन सिर्फ पंजाब के किसानों का है। जिन्हें बहकाया जा रहा है।

इसे आंदोलनकारी किसानों की ताकत ही कहा जाएगा कि उन्हें कश्मीर से कन्याकुमारी तक व्यापक समर्थन मिला। चक्का जाम के दौरान किसान न तो कहीं उत्तेजित हुए न ही कानून व्यवस्था को प्रभावित करने का काम किया। इसके अलावा एम्बुलेंस को न सिर्फ रास्ता बल्कि जाम से प्रभावित होने वाले आम लोगों से माफी भी मांगी।

जिस तरह से किसानों का आंदोलन फैल रहा है उसका असर उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव और पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर पड़ना तय है। कांग्रेस और विपक्ष आंदोलन का समर्थन कर रहा है। इन हालात में भाजपा नेताओं के सामने संकट बढ़ता जा रहा है।

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