किराएदारो और मकानमालिको को लेकर सरकार का बड़ा फैसला जरूर जान ले -

किराए पर रहने वाले लोग मकान खाली करने में आनाकानी करते हैं। ऐसे में एक किराएदार के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिसके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्‍थर नहीं मारते। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही एक बार फिर ये साफ हो गया कि मकान मालिक ही किसी मकान असली मालिक है। किराएदार चाहे जितने भी दिन किसी मकान में क्‍यों न रह ले उसे ये नहीं भूलना चाहिए कि वह मात्र एक किराएदार है।

 दरअसल, दोस्तों एक किरायेदार ने करीब तीन वर्षों से मकान मालिक को किराया नहीं दिया था और न ही वह दुकान खाली करने के मूड में था। थक हारकर मकान मालिक को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जिसके बादअदालत ने किरायेदार को न केवल बकाया किराया चुकाने बल्कि दो महीने में दुकान खाली करने के लिए कहा। साथ ही वाद दाखिल होने से लेकर परिसर खाली करने तक 35 हजार प्रति महीने किराये का भुगतान करने के लिए भी कहा था

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