अब भारतीय बच्चों के हाथ में नहीं दिखेंगे चीनी खिलौने! पीएम मोदी ने कर ली इसे बाहर करने की तैयारी

गलवान घाटी में संघर्ष के बाद भारत आर्थिक मोर्चे पर चीन को सबक सिखाने की तैयारी कर रहा है। चीन के प्रति हिन्दुस्तानी ग्राहकों और कारोबारियों का व्यवहार बदलते ही देश में चाइनीज खिलौनों की मांग घटी गई है। जिसका सीधा सीधा लाभ भारतीय खिलौना निर्माताओं को मिल रहा है।

मोदी वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक में भारतीय खिलौनों के विनिर्माण को बढावा देने और उनकी दुनिया भर में पहचान बनाने के उपायों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि भारत खिलौने बनाने का प्रमुख केन्द्र रहा है और यहां के कलाकार ऐसे स्वदेशी खिलौने बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं जो देश की संस्कृति समाये रहते हैं और बच्चों को कौशल ज्ञान देने का काम करते हैं। बैठक में बताया गया कि भारतीय खिलौना बाजार में अपार संभावनाएं हैं और आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को बढावा देकर खिलौना उद्योग में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

इस बात पर भी चर्चा हुई कि खिलौने सामाजिक बदलाव का माध्यम बनकर किस तरह से राष्ट्र की भविष्य की पीढी को नया आयाम दे सकते हैं। प्रधानमंत्री ने बच्चे की मानसिकता को ढालने में खिलौनों के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में बच्चों के चहुमुखी विकास के लिए इस पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

PM मोदी ने सुझावा दिया कि युवाओं को इस तरह के डिजायन तैयार करने चाहिए जो राष्ट्रीय लक्ष्यों और उपलब्धियों के बारे में गौरव की भावना पैदा करें। उन्होंने कहा कि खिलौने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढावा देने के शानदार माध्यम साबित हो सकते हैं साथ ही इनके जरिये भारतीय मूल्यों और पर्यावरण के अनुकूल रूख को भी दर्शाया जा सकता है। सरकार भी छोटे उद्योगों को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं और छात्रों के लिए इस संबंध में एक बार जरुर सोचना चाहिए।

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